उम्र के इत्मिनान में

उम्र के इत्मिनान में ,

बहुत संभल कर उतर रही हूँ,
कुछ सम्बल हैं,
वक्तव्य हैं,
और मैं हूँ,
अब सोचती हूँ,
क्या सोचती हूँ,
पर, यह काफी है,
सोचती हूँ!
मैं ढल रही हूँ,
परिपक्वता के
सांचे में।
शायद?