You would kill me , Stranger..न जाने क्यों तुम कहीं शब्दों के , जंजाल ढूंढ लाते हो?

अपने और हमारे बीच जज़्बात खींच लाते हो ,
कई बार बेवजह सी वजह मुस्कान खिंच लाते हो।
मैं खामोशियों के दरमियाँ जब तुम्हे जिया करती हूँ ,
न जाने क्यों तुम कहीं शब्दों के , जंजाल ढूंढ लाते हो?
उलझ सी जाती हूँ , कुछ इस तरह क़ि फिर से मैं अनसुलझी
उलझन में पड़ जाती हूँ।
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