मेरे हमसफ़र , तुम्हें देख कर 

मैं सुनती हूँ तुम्हें , बड़े गौर से
देखती हूँ , बड़े गौर से
महसूस तुम भी करते हों
साथ तुम भी देते हो।
यूँही जब हम साथ बैठा करते हैं
तुम बोलते हो , और हम सुना करते हैं
फिर हम अपनी ही बातों पर बैठ कर
हंसा करते हैं।
महसूस तुम भी करते हो ,
महसूस हम भी करते है
साथ तुम भी चलते हो
साथ हम भी चलते हैं।
तुम चुप भी रहते हो ,
हम चुप भी रहते हैं
खामोशियों की सतह में
हम शब्दों के  वर्तुल में ,
दोनों घूमा फिरा भी करते हैं।
ढंग अलग सा है दोनों का ,
मुस्कराया तुम भी करते हो
, मुस्करा हम भी देते हैं
जानते हम दोनों ही है ,
हम एक दूसरे को बेहतर समझते हैं।
वायदा तुम नहीं करते ,
वादा हम लिया नहीं करते
मगर तुम साथ , हम साथ
जब होते हैं , हम कहा
कुछ नहीं करते ,
पर सुना करते है।
और बस तुम्हें गौर से ,
सिर्फ देखा करते हैं।
वक़्त बढ़ जाएगा ,
हम दोनों को पीछे छोड़ कर
हाथ तुम भी पकडे हो ,
हाथ छोड़ कर।
हाथ हम भी पकडे हैं।
साँसों को रोक कर,
साथ दोनों ,
साथ न हो कर।
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Published by: Sumita Jetley

I had never thought that writing takes such a heart in me. I never had thought that I and it would be in each other but suddenly I as well know, life is never without it be, expressed and relished in its foremost quiet beauty.

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