The Flights of Sky , The Plights of Mine.

कई बार सोचती हूँ कि कहीं आकाश खुले और मुझे समेट ले

क्यों मैं ही मुस्कराहट फैलाती फिरूँ ?
मैं भी आंसूओं के झंझवात में चुप चाप सिमट सा जाना चाहती हूँ
कई बार खामोश आंसू बहाना चाहती हूँ , रो कर , भावनाओं में बह कर
पर तभी आकाश समेट लेता है अपनी बाहों में
मना सा लेता हैं , बहला सा देता है
मैं फिर से सिमट आती हूँ , उसकी बातों में
और जा कर फिर से खुद को जानें देती हूँ , उसकी बातों में
यही हैं शायद इसके और मेरे बीच में
एक अनकहा सा बेबाक विश्वास , एक प्रवाह
एक मौज , एक दूसरे की चाहत।
जो ले सा जाती है दूर तक , बहुत दूर तक।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s